अरविंद केजरीवाल पर हमला: काले झंडे, पत्थरबाजी और सियासी आरोपों की बौछार
आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर दिल्ली चुनाव 2025 प्रचार के दौरान हमला होने का मामला सामने आया है। पार्टी का दावा है कि उनकी कार पर पत्थर फेंके गए और उन्हें काले झंडे दिखाए गए। इस घटना को लेकर AAP और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

AAP का आरोप: बीजेपी ने किया हमला
आम आदमी पार्टी ने एक वीडियो जारी कर दावा किया कि यह हमला बीजेपी के इशारे पर हुआ। AAP ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा,
“बीजेपी हार के डर से बौखला गई है। उनके गुंडों ने अरविंद केजरीवाल पर हमला करवाया।”
पार्टी ने आरोप लगाया कि बीजेपी प्रत्याशी प्रवेश वर्मा के समर्थकों ने केजरीवाल पर पत्थरों और ईंटों से हमला किया। AAP ने यह भी कहा कि इस घटना का मकसद केजरीवाल को चुनाव प्रचार से रोकना था।
उन्होंने चेतावनी दी,
“बीजेपी वालों, इस कायराना हमले से केजरीवाल जी डरने वाले नहीं हैं। दिल्ली की जनता इसका करारा जवाब देगी।”
बीजेपी का पलटवार: AAP पर गंभीर आरोप
बीजेपी ने AAP के आरोपों को खारिज करते हुए उल्टा आम आदमी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए। नई दिल्ली विधानसभा सीट से बीजेपी उम्मीदवार प्रवेश वर्मा ने कहा:
“केजरीवाल की गाड़ी हमारे कार्यकर्ताओं को कुचलते हुए गई, जिससे हमारे एक कार्यकर्ता की टांग टूट गई। मैं उसे देखने अस्पताल जा रहा हूं।”
उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली में पिछले 11 सालों से आम आदमी पार्टी की सरकार ने भ्रष्टाचार फैलाया और शहर को बर्बाद कर दिया। प्रवेश वर्मा ने यमुना नदी की हालत पर भी सवाल उठाए और कहा:
“दिल्ली को बचाने का समय आ गया है। यमुना अब नाले जैसी हो गई है।”
दिल्ली पुलिस का बयान: “कोई हमला नहीं हुआ”
इस मामले में दिल्ली पुलिस ने दोनों पक्षों के दावों पर सफाई दी। पुलिस के अनुसार,
“अरविंद केजरीवाल की पब्लिक मीटिंग के दौरान कुछ बीजेपी समर्थक सवाल पूछना चाहते थे। दोनों पक्षों के बीच नारेबाजी हुई, लेकिन किसी तरह का हमला नहीं हुआ।”
पुलिस ने बताया कि स्थिति को काबू में लाने के लिए दोनों पक्षों को वहां से हटा दिया गया।
घटना या सियासी ड्रामा?
केजरीवाल पर कथित हमले को लेकर दोनों पार्टियों ने एक-दूसरे पर आरोपों की झड़ी लगा दी है। जहां AAP इसे बीजेपी की साजिश बता रही है, वहीं बीजेपी इस घटना को “ड्रामा” करार दे रही है।
दिल्ली में आगामी चुनावों को देखते हुए यह घटना एक बड़ी राजनीतिक बहस का केंद्र बन गई है।
निष्कर्ष:
यह घटना सिर्फ एक हमले तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली की राजनीति में बढ़ते तनाव और चुनावी रणनीतियों को उजागर करती है। केजरीवाल और AAP इसे जनता के समर्थन की अपील के रूप में देख रहे हैं, जबकि बीजेपी इसे “सिर्फ प्रचार का हथकंडा” मान रही है। अब देखना यह होगा कि जनता इन आरोप-प्रत्यारोप के बीच किसका समर्थन करती है।








