UCC के पक्ष में मुस्लिम महिलाएं, सरकार से रखीं अपनी 25 शर्तें

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UCC के पक्ष में मुस्लिम महिलाएं, सरकार से रखीं अपनी 25 शर्तें
UCC के पक्ष में मुस्लिम महिलाएं, सरकार से रखीं अपनी 25 शर्तें

UCC के पक्ष में मुस्लिम महिलाएं, सरकार से रखीं अपनी 25 शर्तें

मुंबई स्थित मुस्लिम महिला संगठन ने समान नागरिक संहिता (UCC) का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार के सामने 25 शर्तों की लिस्ट पेश की है। संगठन ने स्पष्ट किया कि अगर सरकार इन शर्तों को UCC में शामिल करती है, तो वे इसका पूरा समर्थन करेंगी।

UCC के पक्ष में मुस्लिम महिलाएं, सरकार से रखीं अपनी 25 शर्तें
UCC के पक्ष में मुस्लिम महिलाएं, सरकार से रखीं अपनी 25 शर्तें

UCC का समर्थन और शर्तों की मांग

संगठन ने सोमवार को मुंबई में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और अवसर सुनिश्चित करना होना चाहिए, न कि इसे राजनीतिक मुद्दा बनाया जाए।

संगठन ने कहा कि वे मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए यह मांग कर रहे हैं। उनकी शर्तें मुख्य रूप से शादी, तलाक, बहुविवाह, प्रॉपर्टी, और कस्टडी जैसे मामलों पर आधारित हैं।

संगठन का कहना है कि मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए पॉलीगैमी, हलाला, और बाल विवाह जैसे कुप्रथाओं को समाप्त करना जरूरी है।


संगठन की 25 मुख्य शर्तें

1. शादी से जुड़ी शर्तें

  • किसी भी निकाह को तभी वैध माना जाए जब उसमें दुल्हन की स्पष्ट सहमति हो।
  • निकाह को दो व्यस्कों के बीच एक कानूनी अनुबंध माना जाए, न कि धार्मिक संस्कार।
  • हर निकाह का पंजीकरण अनिवार्य किया जाए।
  • निकाहनामा या इकरारनामा को कानूनी दस्तावेज माना जाए।
  • दूल्हे की सालाना आमदनी के आधार पर मेहर तय हो और वह निकाह के समय दुल्हन को दिया जाए।
  • बिना गवाह, बिना मेहर, या बिना पंजीकरण वाले विवाहों को अवैध घोषित किया जाए।
  • बहुविवाह (पॉलीगैमी) को पूरी तरह अवैध घोषित किया जाए।
  • बाल विवाह को रोकने के लिए PCMA, 2006 के प्रावधान मुस्लिम समुदाय पर भी लागू किए जाएं।
  • हलाला, मिस्यार और मुता जैसे विवाहों को समाप्त किया जाए।
  • महिला काजियों को प्राथमिकता देकर पंजीकृत किया जाए।
  • काजियों के पंजीकरण और जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाए।

2. तलाक से जुड़ी शर्तें

  • महिलाओं के लिए भी फस्ख, खुला, और मुबारा जैसे तलाक के तरीके वैध किए जाएं।
  • तलाक-ए-अहसन को पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए लागू किया जाए।
  • अदालत में और अदालत के बाहर तलाक की प्रक्रिया को नियमित और पारदर्शी बनाया जाए।
  • अगर किसी विवाहित मुस्लिम व्यक्ति ने धर्म परिवर्तन किया हो, तो इसे अपने आप निकाह खत्म करने का आधार न माना जाए।
  • इद्दत के दौरान महिला की आजादी और अधिकारों पर कोई रोक न लगाई जाए।

3. अडॉप्शन और कस्टडी से जुड़ी शर्तें

  • तलाकशुदा या विधवा मुस्लिम महिला को बच्चों की प्राथमिक संरक्षक माना जाए।
  • बच्चों की कस्टडी का फैसला बच्चे के हित और उसकी मर्जी के आधार पर किया जाए।
  • माता-पिता के धर्म परिवर्तन या पुनर्विवाह का बच्चों की कस्टडी पर कोई प्रभाव न पड़े।
  • मुस्लिम महिलाओं को भी जेजे कानून के तहत गोद लेने का अधिकार दिया जाए।

4. रखरखाव और प्रॉपर्टी से जुड़ी शर्तें

  • विवाह के दौरान भरण-पोषण CrPC की धारा 125 और 126 के तहत सुनिश्चित किया जाए।
  • वैवाहिक संपत्ति में महिलाओं की हिस्सेदारी और प्रॉपर्टी में बराबरी का अधिकार दिया जाए।
  • मुस्लिम पारिवारिक कानून के मामलों को संभालने के लिए सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त काजियों और मध्यस्थों की नियुक्ति हो।

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मुस्लिम महिलाओं की बड़ी मांग: पूर्ण विधिक पारिवारिक कानून

संगठन ने सरकार से यह भी अपील की कि मुस्लिम पारिवारिक कानून को एक समग्र और पूर्ण कानून का रूप दिया जाए। उन्होंने बताया कि बीएमएमए (BMMA) ने पिछले एक दशक में कई बार सरकार को इसका मसौदा भेजा है, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया। संगठन ने तीन तलाक पर कानून बनने का स्वागत किया लेकिन कहा कि यह समस्या का समाधान नहीं है।


सुप्रीम कोर्ट और सरकार से अपील

संगठन ने सुप्रीम कोर्ट से बहुविवाह (पॉलीगैमी) और हलाला के खिलाफ जल्द फैसला सुनाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि ये प्रथाएं महिलाओं के अधिकारों का हनन करती हैं और इन्हें समाप्त करना जरूरी है।


UCC को लेकर क्या है सरकार का रुख?

केंद्र सरकार UCC को लागू करने को लेकर प्रतिबद्धता दिखा चुकी है। बताया जा रहा है कि अगले साल इसे लागू करने पर विचार हो सकता है। मुस्लिम महिला संगठन का समर्थन और उनकी शर्तें इस मुद्दे को और भी महत्वपूर्ण बना सकती हैं।


क्या बदल सकता है?

मुस्लिम महिला संगठन का यह कदम देश में समान नागरिक संहिता पर एक नई बहस को जन्म दे सकता है। यदि उनकी शर्तें मानी जाती हैं, तो यह न केवल मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करेगा, बल्कि UCC को व्यापक समर्थन भी मिलेगा।

नजर बनी रहे: अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और सुप्रीम कोर्ट इस दिशा में क्या कदम उठाते हैं और मुस्लिम समाज में महिलाओं के अधिकारों को लेकर क्या बदलाव आते हैं।

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