कासगंज: चंदन गुप्ता हत्याकांड में सभी 28 दोषियों को उम्रकैद, NIA कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
6 साल 11 महीने 7 दिन बाद आया ऐतिहासिक फैसला
उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में 26 जनवरी 2018 को हुए बहुचर्चित चंदन गुप्ता हत्याकांड का न्याय आखिरकार मिल गया। एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) की विशेष अदालत ने इस मामले में 28 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। वहीं, दो आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।

क्या है चंदन गुप्ता हत्याकांड?
26 जनवरी 2018 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर कासगंज में तिरंगा यात्रा के दौरान दो समुदायों के बीच तनाव हुआ, जो जल्द ही हिंसा में बदल गया। इस हिंसा में 22 वर्षीय चंदन गुप्ता की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना ने पूरे देश में रोष और आक्रोश फैला दिया था।
परिवार की न्याय के लिए संघर्ष
चंदन गुप्ता के पिता सुशील गुप्ता ने इस घटना के बाद न्याय पाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। शुरुआत में एफआईआर में 20 लोगों को नामजद किया गया, लेकिन जांच और चार्जशीट के बाद कुल 30 लोगों को आरोपी बनाया गया।
एनआईए कोर्ट का फैसला
एनआईए की विशेष अदालत ने दोषियों को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं जैसे 147 (दंगा), 148 (घातक हथियारों से दंगा), 307/149 (हत्या का प्रयास), 302/149 (हत्या), 341 (गलत तरीके से रोकना), 336 (दूसरों की जान खतरे में डालना), 504 (शांति भंग करने के लिए उकसाना), और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत दोषी ठहराया।
दोषियों की सूची
अदालत ने जिन 28 लोगों को दोषी ठहराया, उनमें शामिल हैं:
- आसिफ कुरैशी उर्फ हिटलर
- असलम कुरैशी
- सलीम, वसीम, नसीम
- मुनाजिर रफी
- आमिर रफी
- शबाब, साकिब, मोहसिन
- राहत, सलमान, निशु, इमरान
- शमशाद, जफर, फैजान, खालिद परवेज
इन सभी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
कौन हुए बरी?
आरोपी नसरुद्दीन और असीम कुरैशी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। इसके अलावा, मामले के एक अन्य आरोपी अजीजुद्दीन की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई।
घटना के बाद का असर
चंदन गुप्ता की हत्या के बाद कासगंज में भारी हिंसा भड़क उठी थी। घटना के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपियों वसीम, नसीम और सलीम समेत 100 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया। हालांकि, बाद में कई आरोपी छूट गए। घटना ने उत्तर प्रदेश और देशभर में कानून व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े किए।
सरकार की घोषणा और परिवार की प्रतिक्रिया
घटना के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने कासगंज में एक चौक का नाम चंदन गुप्ता के नाम पर रखने की घोषणा की थी। अदालत के फैसले के बाद चंदन के पिता सुशील गुप्ता ने कहा, “यह न्याय की जीत है। हमने लंबे समय तक संघर्ष किया और आज हमें इंसाफ मिला।”








