बीजापुर में सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में पत्रकार मुकेश चंद्राकर मर्डर केस की जांच कर रही एसआईटी ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी ठेकेदार सुरेश चंद्राकर ने अपने भाइयों और सहयोगियों के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची थी। यह हत्या एक साजिश के तहत इसलिए की गई क्योंकि पत्रकार मुकेश ने सुरेश के सड़क निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार को उजागर करने वाली खबरें प्रकाशित की थीं।

हत्या की योजना और साजिश
बैंक से निकाली गई बड़ी रकम
एसआईटी ने खुलासा किया कि सुरेश ने घटना से चार दिन पहले अपने बैंक खाते से बड़ी रकम निकाली थी। इस पैसे का इस्तेमाल हत्या की योजना को अंजाम देने के लिए किया गया।
अपराध स्थल पर बेरहमी से हत्या
1 जनवरी को मुकेश चंद्राकर को सुरेश के स्वामित्व वाली संपत्ति के कमरे नंबर 11 में ले जाया गया। वहां, लोहे की रॉड से उन पर हमला किया गया, जिससे उन्हें घातक चोटें आईं। इसके बाद, उनके शव को सेप्टिक टैंक में डालकर कंक्रीट से ढक दिया गया ताकि सबूत नष्ट हो जाए।
सबूत छुपाने की कोशिश
मोबाइल फोन तोड़े और नदी में फेंके
हत्या के बाद, आरोपियों ने मुकेश के दो मोबाइल फोन तोड़ दिए और उन्हें बीजापुर से 65 किलोमीटर दूर तुमनार नदी में फेंक दिया। हालांकि, गोताखोरों की मदद से तलाशी के बावजूद मोबाइल फोन बरामद नहीं हो सके।
गाड़ियां और सामग्री बरामद
हत्या में इस्तेमाल की गई चार गाड़ियों को जब्त कर लिया गया है। इसके साथ ही, लोहे की रॉड और अन्य सामग्री को भी बरामद कर लिया गया है, जिसे अपराध स्थल के पास छुपाया गया था।
डिजिटल तकनीक से जांच
इस मामले की जांच में एसआईटी ने पहली बार बड़े पैमाने पर AI और OSINT Tools का उपयोग किया। डिजिटल तकनीक की मदद से, आरोपियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की जांच की गई और उनके मोबाइल डेटा को रिकवर करने की कोशिश की जा रही है।
जांच से जुड़े मुख्य तथ्य:
- पुलिस ने 50 से अधिक लोगों से पूछताछ की है।
- सभी तलाशी और जब्ती की कार्यवाही की वीडियोग्राफी की गई है।
- एसआईटी ने घटना से जुड़े सबूतों को केस डायरी में दर्ज कर लिया है।
न्यायिक रिमांड पर आरोपी
पुलिस ने सुरेश चंद्राकर को हैदराबाद से गिरफ्तार किया, जबकि अन्य तीन आरोपियों को पहले ही हिरासत में लिया जा चुका था। फिलहाल चारों आरोपी 15 दिनों की न्यायिक रिमांड पर हैं। क्राइम सीन को पूरी तरह से सील कर जांच की जा रही है ताकि किसी भी सबूत को नष्ट होने से बचाया जा सके।
निष्कर्ष
पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या ने पत्रकारिता के जोखिमों को उजागर किया है, खासकर जब वह भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े होते हैं। एसआईटी की गहन जांच और डिजिटल तकनीक के उपयोग से मामले को सुलझाने की प्रक्रिया जारी है। पुलिस के लिए यह मामला न केवल एक चुनौती है, बल्कि न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।








